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मेरी अविरल अभिव्यक्ति - एक छोटी-सी कोशिश है मेरे मन-मस्तिष्क में गूँजती आवाज़ों को कलम के माध्यम से कोरे काग़ज़ पर उतारने की, मेरे मन के भगवान के चरणों में कुछ महकती शब्दों की माला अर्पण करने की, अपितु ये भी सच है कि इन शब्दों की प्रेरणा, इन मनोभावों की सरिता, इस कलम की स्याही बनकर वो ही पल-पल बसे रहे, तो ये भी सच है कि मैं एक माध्यम हूँ उनके रहस्यमयी रचना की|
कोशिश बस इतनी है कि इन मकड़ीनुमा कहानियों में, मेरे मन की काली चादर में, दूधिया रौशनी की सुंदरता निहार सकूँ, इन चमचमाती आइनों की भीड़ में अपनी भूमिका को सार्थक कर सकूँ|
कविताएँ हैं जिनमें कभी रोस से भरा मन, तो कभी हर्षोल्लास-से भरी कोयल की मीठे आम के पेड़ों से वो पहली सुरीली आवाज़, कभी विडंबनाओं के उलझे धागों को सुलझाने की नायाब पहल, कभी ज़िंदगी के पर्वत-रूपी श्रृंखला से परास्त बैठा बुझा-बुझा-सा मन और कभी न हार मानने वाला हठ-से भरा मासूम बचपन| इन सभी को स्याही से पिरोने की एक छोटी-सी कोशिश ही तो है|
मेरे इस इंद्रधनुषी संकलन में कुल ३८ कवितायें हैं, जिन्हें पाँच सर्गों में बाँटा गया है | सर्ग एक: दर्शन झरोखा में कुल १२ कवितायें हैं, सर्ग दो: नारी उत्थान में ८, सर्ग तीन: सामाजिक चेतना में ८, सर्ग चार: हास्य व्यंग्य में ३ और सर्ग पाँच: विविध में ७ कवितायें हैं |
कोशिश है की इन कविताओं के माध्यम से कुछ नए आयाम, कुछ खट्टे-मीठे पल, कुछ मन को उद्वेलित करने वाले प्रश्न, कुछ समाज की विसमताओं को सुलझाने की छोटी-सी कोशिश आपके साथ साँझा कर सकूँ |
आशा है मेरी यह छोटी-सी कोशिश आपके विचारों को नए सुनहरे पंख दे|
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